भारतीय नागरिक विचार / MAKE IN TEAM INDIA

स्थानीय वासी एवं प्रवासी (परप्रांतीय) / अप्रवासी की एकता ही भारत देश के विकास में सहयोग करेगी

भारतीय प्रवासी (परप्रांतीय) व्यक्तियों के भविष्य एवं सम्मान एवं सुरक्षा , तथा वासी एवं प्रवासी एकता की चिंता करते हुए जातिवाद और प्रांतवाद से ऊपर उठकर हर प्रवासी चाहे वो किसी भी प्रान्त (राज्य) का क्यों न हो उनके अधिकार एवं भारत देश की परम्परा, संस्कृति, धर्मनिरपेक्षता एवं सद्भावना, अखंडता को मजबूत करने के लिए भारतीय प्रवासी परिषद का निर्माण किया गया है | जिससे भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) को शिक्षा एवं रोजगार व्यापार, मजदूरी करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े व प्रवासियों परप्रांतीयो) द्वारा देश राज्य के विकास के लिए किये जाने वाले कार्य में कोई बाधा उत्पन्न न हो और अराजकतत्वों के अत्याचार, भ्रष्टाचार से उन्हें बचाया जा सके। क्योंकि भारत में पैदा हुआ व्यक्ति भारत का नागरिक है और यदि वह एक राज्य को छोड़कर अन्य किसी राज्य / देश में जाता है और वहां रहता है तो वह भारतीय प्रवासी (परप्रांतीय) / अप्रवासी व्यक्ति ही हुआ क्योकि हमारे देश में एक राज्य से दूसरे राज्य के लिए डोमिसाइल (मुलनिवास प्रमाण पत्र) / मैग्रेसन (प्रवासी माणपत्र) बनवाने का प्रावधान है | भारतीय इतिहास में भारत के प्रत्येक कॉलेज में यदि रैगिंग होती है तो प्रवासी (परप्रांतीय) विधार्थियो के साथ ज्यादा एवं आत्महत्या भी प्रवासी विद्यार्थी ही ज्यादा करते है क्यों ? और प्रवासी (परप्रांतीय) विद्यार्थियों / मजदूरों के साथ शासन व प्रशासन भी भेद-भाव करता है क्यों ? भारत के प्रत्येक राज्य में प्रवासियों (परप्रांतीयो) की गणना प्रवासी सूचना केंद्र / प्रवासी सहायता केंद्र बनाकर करना अतिआवश्यक है | क्योंकि राज्य सरकार बनाने में प्रवासियों (परप्रांतीयो) की अहम भूमिका होती है | इस प्रवासी सूचना केंद्र / प्रवासी सहायता केंद्र की गणना से देश द्रोहियों, आतंकियों एवं घुस पैठियों की पहचान आसानी से की जा सकती है | लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि आज के परिवेश में जब भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) को दुसरे राज्य का कहा जाता है था हिंदी भाषा को हेय दृष्टि से देखा जाता है तो हमें दुःख होता है। जबकि हमें हिंदी भाषा को महत्व देना चाहिए क्योंकि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और भारत का प्रत्येक व्यक्ति सबसे पहले भारतीय नागरिक, भारतवासी है | क्योंकि ये तो वही हुआ जैसे अंग्रेजो (विदेशियों) की नीति थी, फुटडालों और राज करो | हमारे देश में आज भी वही नीति चल रही है अंतर सिर्फ व्यक्तियों का है हमे इस नीति को बदलना होगा और भारत के संविधान को प्रत्येक जाती धर्म व राज्य के लिए एक समान करना होगा , हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश है यंहा हर धर्म, जाति व भाषा के लोग रहते हैं हमें इन सबका सम्मान करना होगा और भारत-देश की एकता, अखंडता पर बल देना होगा | आज हमें कहना पड़ता है की हां हम भारत के नागरिक भारत में ही कंही न कंही भारतीय प्रवासी (परप्रांतीय) हैं। लेकिन भारत देश की वासी प्रवासी (परप्रांतीय) की एकता “मेक इन टीम इंडिया” बहुत जरुरी है| जैसे ”जात पात का भेदभाव इंकार है, प्रांतवाद भेदभाव बेकार है, हम सब भारतवासी हैं हमें भारत से प्यार है, वासी प्रवासी (परप्रांतीय) की एकता यही हमारा विचार है” । भारत के प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक राज्य में राज्य भारत सरकार से समान अधिकार मिलना चाहिए और प्रत्येक प्रवासी (परप्रांतीय) को प्रत्येक राज्य में दूध में चीनी की तरह रहकर उस राज्य देश के विकास के लिए काम करना चाहिए | यह भावना पडोसी राज्य लगभग निभाते भी है | लेकिन भेदभाव बरकरार रहता है भारतीय प्रवासी (परप्रांतीय) परिषद दुनिया के लगभग 26 देशो (सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, (यू. ए. इ.), क़तर, सिंगापूर, हांगकांग, मलेशिया, अजर वेजान, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी) में कैदियों की तरह विपरीत हालातो में काम करने वाले भारतीय अप्रवासी श्रमिको की आवाज़ बनकर भारत देश के विदेशी / प्रवासी (परप्रांतीय) मंत्रालय से सहयोग कराने का कार्य करेगा | दरअसल विदेशो में काम करने वाले भारतीय प्रवासी (परप्रांतीय) मजदूरों का मसला बड़ा गंभीर व् जटिल है | सभी को ज्ञात है की खाड़ी देशो में अप्रवासी मजदूरों के हालात क्या थे और उन्हें अच्छी नौकरी का सपना दिखा कर अरब देशो में भेजा तो जाता है लेकिन न्यूनतम मजदूरी, मेडिकल एवं बीमा जैसी सुविधाए भी नही मिलती हैं | आज भारत देश विश्व की आर्थिक शक्ति बन चुका है |

ऐसे में भारत देश को भारतीय नागरिको, प्रवासी (परप्रांतीय) / अप्रवासी मजदूरों के साथ होने वाले ख़राब व्यवहार को रोकना होगा क्योंकि विदेशो में प्रवासियों (परप्रांतीयो) के प्रति श्रम कानूनों के प्रति घोर अनदेखी की जा रही है | प्रवासी (परप्रांतीय) / अप्रवासी चाहे देश के अन्य राज्य में हो या विदेशो में हो, देश की अखंडता के लिए हमें उनके भविष्य की चिंता करनी होगी | साथ-साथ भारत देश के गरीब नागरिक, गरीब किसानो, गरीब मजदूरों के उत्थान के लिए विकासशील योजना लागु करनी होगी | हम भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) को 3 श्रेणियों में बाँट कर देखे तो नंबर एक :- सरकारी कर्मचारी, आई.ऐ.एस., पी.सी.एस एवं उच्च अधिकारी नंबर दो :- राज्यों द्वारा निमंत्रित व्यवसायिक, व्यापारी इन सभी को प्रवासी (परप्रांतीय) होने का एहसास शायद नही होता है लेकिन उन प्रवासियों (परप्रांतीयो) का क्या होगा जो शिक्षा ग्रहण करने, दाई का काम करने, नर्स / वार्ड बॉय का काम, मजदूरी का काम, ठेला चलाना एवं रेहड़ी लगाने का काम, ऑटोरिक्शा एवं रिक्शा चलाने का काम या गरीबी रेखा के अन्दर जीने पर मजबूर है उनका दर्द व उन पर हो रहे अत्याचार को कौन सुनेगा ? उनके उत्थान के लिए कौन सोचेगा ? आज हमारे देशको आज़ाद हुए लगभग कई वर्ष बीत जाने के बाद भी भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) / आप्रवासियों को हीन भाव से देखा जाता है चाहे वो भारत देश के किसी राज्य व अन्य देश में रहते हो । प्रत्येक भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो)/ आप्रवासियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है । जिसको बयांन हीं किया जा सकता। हम उन गन्दी विचार धारा के लोगों का नाम इसलेख में नहीं देना चाहते हैं । जो प्रवासियों (परप्रांतीयो) को हमारे ही देश में पराये राज्य का कहकर गालियां देते हैं, मारते हैं और भाग जाने को कहते हैं। जबकि प्रत्येक राज्य का व्यक्ति किसी न किसी राज्य का वासी और किसी राज्य में प्रवासी (परप्रांतीय) है लेकिन सबसे पहले भारतवासी है | सोचिये यदि अपने ही देश में ये हाल है तो भारत देश से बाहर रहने वाले भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) की हम क्या मदद करेंगे। इसमें राज्य व केंद्र सरकार के प्रशासन की कमजोरी साफ़ साफ़ दिखती है ,जबकि भारतीय प्रवासी (परप्रांतीय) व्यक्ति एकपंछी की तरह अपने हुनर व काबिलियत से राज्य भारत देश के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं तथा राज्यों व भारत सरकार द्वारा बनाये हरनियम का पालन करते हैं। फिर भी भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) / आप्रवासियों को प्रत्येक राज्य / विदेशो में हीन दृष्टि से देखा जाता है। और जो अधिकार उन्हें मिलना चाहिए वो न हीं मिल पाता है। आखिर प्रवासी (परप्रांतीय) कब तक अपने ही देश में पराया रहेंगे | और नकारात्मक सोच वाले लोगों का शिकार बनते रहेंगे। भारत देश के प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री को अपने राज्य में अच्छी शिक्षा ,व्यापार,नौकरी की व्यवस्था करनी होगी जिससे उस राज्य का व्यक्ति पलायन न करे तथा जो (परप्रांतीय) उस राज्य में रह रहे है उनके लिए प्रवासी (परप्रांतीय) सुचना केन्र्द खोलकर उनकी सुरक्षा, सम्मान व् समान अधिकार की व्यवस्था करना चाहिए | भारतीय प्रवासी परिषद भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) / आप्रवासियों को विश्वास दिलाना चाहती है की देश / विदेश में रह रहे प्रवासियों (परप्रांतीयो) / अप्रवासियो के अधिकार तथा देश की अखंडता, परम्परा, एकता और संस्कृति, सद्भावनाके लिए संघर्षरत रहेगी तथा उनके सम्मान, सुरक्षा व् स्वाभिमान के लिए किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्तन हीं करेगी और जब-जब भारतदेश के विकास के लिए कार्य करने वाले राजनितिक व्यक्ति आएंगे भारतीय प्रवासी परिषद उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर देश के विकास में सहयोग करेगी। और भारत देश को स्वस्थ्य, स्वच्छ और विकासशील बनाने के लिए संघर्षरत रहेगी।“ हर वासी / प्रवासी (परप्रांतीय) /अप्रवासी का सपना सुरक्षित और स्वच्छ भारत हो अपना ”।भारत के प्रत्येक चुनाव में राजनैतिक व सामजिक व्यक्तियों ने अपने व्यक्तव में प्रवासियों (परप्रांतीयो) / अप्रवासियो का वोट लेने के लिए अनुमानित प्रवासियों (परप्रांतीयो) की गणना / संख्या भी कई बार बताई है| भारत के प्रत्येक राज्य व् विदेशो में लगभग 15 लाख से 160 लाख भारतीय प्रवासी (परप्रांतीय) पंछी की तरह रहते हैं जो देश व प्रदेश (राज्य) के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। हमें उनका सम्मान करना चाहिए और समय-समय पर देश के विकास में किये गए कार्यों के लिए पुरस्कार से सम्मानित भी करना चाहिए। भारत के प्रत्येक राज्य के व्यक्ति प्रवासियों (परप्रांतीयो)  के लिए संरक्षक होता है और प्रवासी (परप्रांतीय)  उस राज्य / देश का सेवक, अतिथि होता है, यह भावना दोनों के लिए जरुरी है | आज देश प्रदेश के समाचार पत्र, टेलीविज़न, सरकार और राजनितिक पार्टियां भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) / अप्रवासियों की चिंताकर रही हैं। तथा अतिथि देवो भव: के नारे को मजबूत कर रही है। क्योंकि देश / प्रदेश / विदेश में भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो)  / आप्रवासियों का देश-प्रदेश के विकास व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होता है |हम सभी इस सच्चाई को भली-भांति जानते हैं, फिर भी देश / प्रदेश में कुछ असामाजिक तत्व ऐसे भी हैं जो भारत देश की परम्परा, संस्कृति को भूल जाते हैं और शर्मसार करने वाली हरकतें करते रहते हैं |

इसीलिए भारतीय प्रवासी परिषद ने प्रवासियों (परप्रांतीयो)  /आप्रवासियों चाहे वो भारत देश से बाहर रहते हों या देश में किसी भी राज्य में रहते हों उनके सम्मान सुक्षाव स्वाभिमान की रक्षा एवं एकता तथा गरीब मजदूर, गरीब विद्यार्थी, बुज़ुर्ग व्यक्ति केउत्थान के लिए भारतीय प्रवासी परिषद का निर्माण किया है। जिसमे भारत देश के विभिन्न गणमान्य महोदय संरक्षक हैं और वासी-प्रवासी (परप्रांतीय) – अप्रवासी की एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए भारतीय प्रवासियों (परप्रांतीयो) / आप्रवासियों / स्थानीय वासियो के सहयोग से भारत के प्रत्येक राज्य में संगठन बनाकर वासी एवं प्रवासी (परप्रांतीय) / अप्रवासी एकता का परिचय देते हुए भारत सरकार से अपनी उचित मांग को पूरा करवाने का कार्य करना चाहती है जिससे जात –पात और प्रान्त वाद का भेदवाव ख़त्म हो सके और इस तरह वासी एवं प्रवासी (परप्रांतीय)  भारतीयो के पारस्परिक सहयोग के जरिये विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य भी करती रहेगी तथा सांस्कृतिक, व्यावसायिक,आर्थिक, सामाजिक व दानशीलता तथा अन्य परस्पर सहयोग के द्वारा वासी व प्रवासी (परप्रांतीय) भारतीयो आगामीआ ने वाली पीढ़ियों को पिछली पीढ़ियों से जुड़वाने का कार्य भी करती रहेगी ।इसीलिए भारतीय प्रवासी परिषद स्वत्: आपसे जुड़ना चाहती है, यदि आपको उपरोक्त बाते सत्य लगती है तो सदस्यव् पदाधिकारी बनने के लिए हमारी वेबसाइट bharatiyapravasiparishad.com & bpponline.in व् एप्प (BPP-APP) (Only for Andriod User) जरूर देखें और सदस्यव् पदाधिकारी बनें तथा वासी व प्रवासी (परप्रांतीय) / अप्रवासी एकता व् देश की अखंडता को मजबूत करने के लिए आग्रह करती है ।

“जय हिन्द, जय भारत “ भारतीय एकता जिंदाबाद “

डॉ अजय तिवारी

(राष्ट्रीय अध्यक्ष)